Friday, 28 December 2018

[2019] Mirza Ghalib Shayari Collection In hindi

Mirza Ghalib Shayari Collection In Hindi

नमस्कार दोस्तों देखा जाए तो इस दुनिया में शेरो शायरी हर किसी को पसंद होती है. और आज के इस दौर में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें शायरी पसंद है और इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो शायरी लिखते भी हैं.  लेकिन क्या आप जानते हैं की शेरो शायरी में ऐसा कौन सा नाम है जिसे हर कोई पसंद करता है. दरअसल वह जनाब है मिर्ज़ा ग़ालिब, और इसी लिए आज हम आप लोगों के लिए Mirza Ghalib Shayari Collection In Hindi लेकर आये हैं. जिसे देख आप भी समझ जाओगे  की आखिर क्यों इन्हें इतना बड़ा शायर माना जाता है और आखिर क्यों आज भी लोग इनकी लिखी शायरी को पढ़ते हैं और उसमें खो जाते हैं. तो दोस्तों यह Mirza Ghalib Shayari  जिसे आप आसानी से पढ़ सकते हैं और अपने दोस्तों को व्हाट्सअप और फेसबुक में भी इसे भेज सकते हैं.

Mirza Ghalib Shayari in Hindi

Mirza Ghalib Shayari In hindi


Mirza Ghalib Shayari In hindi


हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पर दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के"

चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला

न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता
डुबोया मुझको होनी ने, न होता मैं तो क्या होता?

हाथों की लकीरों पर मत जा ए ग़ालिब,
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होता
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi

मोहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का,
उसी को देखकर जीते हैं जिस काफिर पर दम निकले

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई,
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई

दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए,
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए

आशिक़ हूँ पर माशूक़-फ़रेबी है मिरा काम,
मजनूँ को बुरा कहती है लैला मेरे आगे

इश्क पर ज़ोर नहीं है,
ये वो आतिश  है गालिब कि लगाए न लगे और बुझाए न बुझे

Best Mirza Ghalib Shayari Collection

Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi

मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब
यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी

बे-वजह नहीं रोता इश्क़ में कोई ग़ालिब
जिसे खुद से बढ़ कर चाहो वो रूलाता ज़रूर है

फिर उसी बेवफा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है

खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम,
कहीं ऐसा न हो यहाँ भी वही काफिर सनम निकले

तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिला के दिखा
नहीं तो दो घूँट पी और मस्जिद को हिलता देख
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi


मोहब्बत मैं नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते है जिस काफिर पे दम निकले

थी खबर गर्म के ग़ालिब के उड़ेंगे पुर्ज़े ,
देखने हम भी गए थे पर तमाशा न हुआ

तेरे हुस्न को पर्दे की ज़रुरत नहीं है ग़ालिब
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद

कितने शिरीन हैं तेरे लब के रक़ीब
गालियां खा के बेमज़ा न हुआ
कुछ तो पढ़िए की लोग कहते हैं
आज ‘ग़ालिब ‘ गजलसारा न हुआ

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
काटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई
दोनों को एक अदा में रजामंद कर गई
मारा ज़माने ने ‘ग़ालिब’ तुम को
वो वलवले कहाँ , वो जवानी किधर गई
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi

नादान हो जो कहते हो क्यों जीते हैं “ग़ालिब “
किस्मत मैं है मरने की तमन्ना किसी दिन और

इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया,
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया

Best Mirza Ghalib Shayari

Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi

जब लगा था तीर, तब इतना दर्द नहीं हुआ "ग़ालिब"
जख्म का एहसास तो तब हुआ, जब कमान देखी अपनों के हाथ में

हर एक बात पे कहते हो तुम की तू क्या है,
 तुम्ही कहो ये अंदाज़-ए -गुफ़्तगू क्या है 

हैरान हूँ तुझे मस्ज़िद में देखकर ग़ालिब
ऐसा क्या हुआ जो तुझे खुदा याद आ गया

कुछ इस तरह से मैंने जिंदगी को आसां कर लिया ग़ालिब,
किसी से माफ़ी मांग ली तो किसी को माफ़ कर दिया

मत पूछ की क्या हाल है मेरा तेरे पीछे,
तू देख की क्या रंग है तेरा मेरे आगे
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi

रहने दे मुझे इस अँधेरे में ग़ालिब,
कम्बख्त रौशनी में अपनों के असली चेहरे नज़र आ जाते है

वो मिले भी तो खुदा के दरबार में ग़ालिब,
अब तू ही बता मोहोब्बत करते या इबादत

गुज़र जायेगे ये दोर ग़ालिब जरा इत्मीनान तो रख
खुसी ही न ठहरी तो गम की क्या औकात है

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आखिर इस दर्द की दवा क्या है

आता है कौन-कौन तेरे गम को बाँटने,
ग़ालिब तू अपनी मौत की अफवाह उड़ा के देख
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi

लोग बदलते नहीं ग़ालिब, बेनकाब होते है

ए बुरे वक़्त जरा अदब से पेश आ, क्योकि वक़्त नहीं लगता वक़्त बदलने में

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल,
जब आँख से ही नहीं टपका तो लहू क्या है

ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजिये,
एक आग का दरिया है डूब कर जाना है

हमने मोहोब्बत के नशे में आकर  उसे खुदा बना डाला,
होश तो तब आया जब उसने कहा खुदा किसी एक का नहीं होता 
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi
Mirza Ghalib Shayari In hindi

मुझ से कहती है तेरे साथ रहूंगी सदा ग़ालिब
बहोत प्यार करती है मुझे उदासी मेरी

उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा,
धूल चेहरे पे थी और आईना साफ़ करता रहा

हुई मुद्दत की ग़ालिब मर गया पर याद आता है,
वो हर एक बात पर कहना की, यूं होता तो क्या होता 

तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई
मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई

पीने दे बैठ कर मस्ज़िद में ग़ालिब
वरना वो जगह बता जहाँ खुदा नहीं

हम तो फनाह हो गए उसकी आँखें देखकर ग़ालिब,
ना जाने वो आईना कैसे देखते होंगे 

गुनाह करके कहाँ जाओगे ग़ालिब,
ये जमीं और आस्मां सब उसी का है

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तो दोस्तों महान शायर Mirza Ghalib के द्वारा लिखी यह शेरो शायरी आप लोगों को कैसी लगी, हमें उम्मीद है की Mirza Ghalib Shayari In Hindi जोकि ख़ास तकरेंर पर हम आप लोगों के लिए लेकर आये हैं वह आपको अच्छी लगी होगी, और आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट कर के जरूर लिखें, आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद.

1 comment:

  1. Thanks for sharing Beautiful and heart touching collection couplets of Mirza Ghalib.

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