Tuesday, 25 September 2018

परीक्षा के समय हम भारतीयों को किन हालातों से गुज़रना पड़ता है देखे इन मजेदार तस्वीरों में

नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से मेरे लेख में स्वागत है. दोस्तों जैसे की आप सभी तो जानते ही है की भारत में परीक्षा तो चली ही रहती है और जब भी परीक्षा आती है तो हमारा हाल पर क्या होता है आईये दोस्तों दिखाते है आपको इन तस्वीरों में.

हम स्टूडेंट्स पूरा साल इतनी ज्यादा मौज़ करते है की हमें ये तक याद नहीं रहता है की हम यहाँ पढ़ने आयें हुए है या फिर घर वालों ने सिर्फ मौज़ मस्ती करने के लिए भेजे है. पर फिर जब परीक्षा को एक ही रात रह जाती है तो उस समय याद आती है की हम तो पढ़ने के लिए आयें है यहाँ पर.

जब भी हमें क्लास में पढ़ाया जाता है वो सभी कुछ इतना ज्यादा आसान होता है की में आपको क्या बताऊ. पर जब हम परीक्षा में बैठते है तो पता चलता है की जो हमने पढ़ा है वो कितना अलग था जो पेपर में आया है उससे.

जो भी टोपर होते है वो हर दिन पढ़ते है फिर चाहे वो स्कूल या कॉलेज का पहला दिन हो या फिर हो आखिरी दिन पर जो हम जैसे होते है वो अलग होते है वो तो उसी दिन पढ़ते है जिस दिन ज़रूरत होती है नहीं तो नहीं पढ़ते है अब आप ही बताओ दोस्तों इन्हे कैसे समझाए.

और हर एक ग्रुप में कोई न कोई ऐसा ज़रूर होता है जो की कहता है की मेने तो एक अक्षर भी नहीं पढ़ा है फिर भी जब रिजल्ट आता है तो पता चलता है की पूरी क्लास में उसने ही टॉप किया है. अब आप ही बाताओ ऐसे आदमी को कैसे समझाया जाए.

और जब भी हम पेपर सबमिट करवाने के लिए जाते है कोशिश हमेशा ही यही रहती है की जो हम अपने दोस्त को दिखाना चाहते है वो हम उसे दिखा सके. और ये हमेशा ही होता है कभी वो हमारे लिए करता है तो कभी हम उसके लिए.

जब पेपर शुरू होता है तो हम शुरू करना शुरू करते है तो इतने अच्छे से लिखने की कोशिश करते है जैसे की हम कोई लेखक हो पर जैसे जैसे समय बीतता जाता है तो हमारी लिखाई ऐसे बदलती जाती है जैसे की हमारे अंदर किसी डॉक्टर का भूत घुस रहा है.

परीक्षा में इस चीज़ का बहुत ही ज्यादा मेहतब होता है पता नहीं कितने लोग पेपर में इसी तरीके को इस्तेमाल कर के ही पास होते है लेकिन हम जो देखते है इसे और जो हमारे टीचर इसके बारे में सोचते है उसमे ज़मीन आसमान का अंतर होता है.

जैसे ही हमारे पेपर खत्म होते थे तो में भी अपने मोबाइल को साफ़ करता था पता नहीं कितनी सारे फोटो होते थे इकठे किये हुए बुक्स के फिर पेपर के बाद पता चलता है की अब ये किसी काम के नहीं है तो अब हम इसे डिलीट कर सकते है.

पेपर में कोई भी नार्मल इंसान होता है वो इतनी तेज़ी से दूसरे का पेपर पढ़ता है जैसे की पता नहीं कितना की इम्पोर्टेन्ट है इतनी तेज़ी से अगर वही आदमी किताब पढ़ता तो आज उसे ये सभी कुछ करने की ज़रूर ही नहीं पड़ती.

जब पेपर खत्म होता है और क्लास की टोपर बाहर आती है और अगर उसने एक नंबर का कोई सवाल छोड़ दिया हो तो वो ऐसे रियेक्ट करती है जैसे की पूरा पेपर ही खाली छोड़ दिया हो. अब आप ही बताओ दोस्तों 100 में से 100 लाना ज़रूरी होते है क्या. 

No comments:

Post a Comment