Saturday, 8 September 2018

लड़कों की हॉस्टल लाइफ कितनी मुश्किल और मजेदार होती है देखे इन 10 मजेदार तस्वीरों में Boys Hostel Life Funny Images In Hindi

Boys Hostel Life Funny Images In Hindi


नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से मेरे लेख में स्वागत है, दोस्तों जैसे की आप सभी जानते ही है की हर दिन आप सभी के सामने कुछ न कुछ नया ले कर आता ही रहता हुं तो आज फिर से आप सभी के सामने कुछ ऐसी तस्वीरें ले कर आ रहा हुं जो की अापने आज से पहले कभी भी नहीं देखी होंगी. तो चलिए दोस्तों शुरू करते है और दिखाते है आपको तस्वीरे. 

कमरे में परदे तो लगते नहीं थे पर पर्दो की रोड पर हमारी जुराबे और कपड़े ही सूखा करते थे क्योंकि बाहर कपड़े सूखने डालना कौन सा आसान होता था क्योंकि बाहर तो कपड़े तब डेल न जब कपड़े धोने का कोई समय हो यहाँ तो जब ज़रूरत हो तभी कपड़े धोते है. 

जितने जुड़ाग आप लोगो को होस्टल में देखने को मिलेंगे मुझे नहीं लगता है की उतने जुगाड़ किसी को और कही पर देखने को मिले. क्योंकि होस्टल ही एक ऐसी जगह है जहाँ पर की बच्चा जुगाड़ करना सीखता है. 

कभी कभी तो हॉस्टल में ऐसे जुगाड़ भी देखने को मिल जाते है जैसा की कोई जिंदगी में कभी सोच भी नहीं सकता है. यहाँ तो हर एक स्टूडेंट जो है वो इंजीनियर ही होता है कोई पता नहीं चलता है की कब कौन सी इन्वेंशन कर डाले. 

एक फिर से जब कपड़े सूखने डालने हो तो सबसे पहले कमरे के परदे जहाँ पर टंगे जाते है उसी जगह की याद आती है. और फिर तो आप जानते ही है की वही पर कपड़े डाल दिए जाते है सूखने के लिए. 

और होस्टल में चाय बनाने का भी शोक होता है हर किसी को. ओर उसके लिए गैस तो होती ही नहीं है तो कुछ लोग ऐसे ऐसे तरीके का इस्तेमाल कर के चाय बनाते है की में आपको क्या बताऊ आप सभी तो जानते ही होंगे. 

और हाँ जब पी लेते थे खूब तो फिर ऐसे ही पड़े पड़े पूरा का पूरा दिन पड़े रहना और सोते रहना कोई चिंता नहीं होती थी की पढ़ने आयें है. अगर मन नहीं है तो नहीं जाते थे कॉलेज में और आजकल तो हर दिन जॉब पर जाना ही पड़ता है. 

और खास बात तो ये होती थी की सफाई तो ज़रा कोई करता ही नहीं था. और अगर होती भी सफाई तो तभी होती थी जब किसी के पेरेंट्स आ रहे हो या फिर टीचर चेक करने आ रहा हो नहीं तो पूरे कमरे में बस गंद ही पड़ा रहता था. 

एक लैपटॉप होता था और सारे दोस्तों मिल कर उसके ऊपर फिल्म देखा करते थे. वो भी क्या दिन थे आज भी मुझे वो दिन याद आते है. जब बह कोई नयी फिल्म आती थी तो सभी मिल कर उसका मज़ा लेते थे. 

गर्ल्स होस्टल में सफाई होती थी पर लड़कों के होस्टल में गंद ही पड़ा होता था. सभी लड़कियाँ अलग अलग हो कर सोती थी पर लड़के सभी एक ही बिस्तर पर एक साथ सोते थे. 

होस्टल से कही जाना हो तो ऐसा ही होता था. एक रूम से हम जा कर एक चीज़ लेते थे फिर दूसरे में जा कर दूसरी और ऐसा ही चला रहता था. और ऐसे हम लोगो ने चार साल निकाल दिए. आज वो दिन याद आते है तो अपने सारे दोस्तों याद आ जाते है. 

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