Thursday, 9 August 2018

देखे 2018 में कबीर दास जी के दोहे बदल कर कैसे हो गए है ( funny kabir das dohe)

funny kabir das dohe

दोस्तों नमस्कार आप सभी का एक बार फिर से मेरे लेख में स्वागत है दोस्तों आज में आपके सामने कुछ ऐसा ले कर आया हुं जिसे देखकर आपकी भी हंसी नहीं रुकने वाली है. आज जो तस्वीरें में ले कर आया हुं वो है कबीर दास जी के दोहो की जिसे आज की जेनरेशन ने बदल कर अपने हिसाब से बना लिया है. चलिए दोस्तों तो शुरू करते है. 

देखा भाई आज के समय में ऐसा भी होता है, इतने बड़े महान आदमी के दोहो से हमें जो सीख मिलती थी वो इन लोगो ने बदल कर क्या से क्या बना दिया आप लोगो ने देख ही लिया होगा. पता नहीं लोग इतना दिमाग कहा से ले आते है, इन लोगो को कोई अवॉर्ड दे देना चाहिए इस काम के लिए. 

इसे पढ़कर तो लगता है ये किसी ऐसी औरत ने बनाया है जिसके घर में खाना खाते समय बड़ी चिक चिक होती है तो उसने सभी को सुनाने के लिए कुछ ऐसे तरीके से अच्छे दोहे बनाये की में क्या कहूं. अब जब भी ये औरत खाना बनाती होगी तभी ऐसे दोहे लग पड़ती होगी गाने. 

लगता है ये उस आदमी के लिखे दोहे है जो की कुछ जायदा ही यहाँ वाह आना जाना करता रहता है, क्योंकि उसी को कुछ ज्यादा ही प्यास लगी रहती होगी तभी तो उसने सोचा की क्यों न ऐसे ही दोहे बना दिए जाए ताकि लोगो को बिना बोले ही पानी पिलाना पड़ जाए. 

वाह जिस भी औरत ने ये सभी कुछ लिखा है उसने तो कुछ ज्यादा ही कमाल कर डाला है इसे पढ़कर ऐसा लग रहा है जैसे की इसने कुछ ज्यादा ही सोच समझ कर दोहा बनाया है. अब तो में भी ऐसे ही कहा करूँगा. लोगो के अंदर भी टैलेंट वैसे कूट कूट कर ही भरा पड़ा है. 

हाँ जी सही कहा ऐसा ही होता है. पर पहली दो लाइन तो मैने पहले  भी सुनी है पर मैने भी कभी ये जो तीसरी और चौथी लाइन है आज से पहले कभी भी नहीं सुनी है. अब जिसने भी इन्हे लिखा है लगता है उस बंदे के पास मुझे जाना ही पड़ेगा. 

इसे पढ़कर लगता है जिसने भी ये बनाया है पक्का पंजाब का ही रहने बाला होगा तभी तो भाई उसने मक्के की रोटी और सरसों के साग की बात कही है. अगर कही और का होता तो फिर थोड़ी नहीं वो मक्के की रोटी और सरसों के साग की बात करता. 

ये उस पत्नी का बनाया हुंआ दोहा लगता है जिसका अपने पति के साथ कुछ ज्यादा ही बार झगता होता होगा. तभी तो उसने ऐसा दोहा बनाया है जो की उस समय काम आएगा जब भी उसका पति खाना नहीं खायेगी और उनकी लड़ाई हुंई होगी. 

ये तो आप सभी भी समझ ही गए होंगे की इस दोहे को लिखने की जो प्रेरणा है कहा से मिली होगी, हाँ जी दोस्तों आप सभी ने ठीक समझा है ये उसी महान औरत के कारण सम्भब हो पाया की ऐसा दोहा लिखा गया है. अगर वो औरत नहीं होती तो ऐसा दोहा कभी भी नहीं लिखा जाता. 

वाह जी वाह कमाल ही है. में चाहता हुं की एक बार इन सभी लोगो से मिलु जिन्होंने की ये दोहे लिखे है. और उनसे मिल कर में पुछु की आखिर उन्हें इस दोहे को लिखने की प्रेरणा कहा से मिली है जो की इतने अच्छे दोहे लिख डाले है. 

ये तो उन्ही लोगो ने लिखा होगा जो की होटल में खाना खाने के कुछ ज्यादा ही शौकीन होते है नहीं तो ऐसा दोहे भला कौन लिख सकता है, पर कमाल के ही होते है भाई लोग भी जो ऐसे ऐसे दोहे लिखने बैठे रहते है. पर कुछ भी है, है तो ओरिजिनल की कॉपी ही न.

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